वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की हालिया Monthly Economic Review में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को मजबूत बताया गया है। समीक्षा के अनुसार घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रही है और विनिर्माण क्षेत्र में भी विस्तार के संकेत बने हुए हैं। हालांकि वैश्विक आर्थिक माहौल में मौजूद अनिश्चितताओं के कारण आने वाले समय में बाहरी जोखिमों पर नजर बनाए रखना जरूरी है। मंत्रालय का आकलन है कि घरेलू आर्थिक आधार फिलहाल मजबूती प्रदान कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए घरेलू मांग और उत्पादन गतिविधियों की गति बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी बाहरी चुनौती
वित्त मंत्रालय ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को भारत के लिए महत्वपूर्ण बाहरी जोखिमों में शामिल किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहने पर भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे चालू खाते और व्यापक आर्थिक संतुलन पर असर पड़ने की संभावना रहती है। जुलाई की आर्थिक समीक्षा में भी मंत्रालय ने लंबे समय तक ऊंची कच्चे तेल कीमतों से राजकोषीय और चालू खाते से जुड़े दबाव की आशंका जताई थी। इसलिए ऊर्जा कीमतों की दिशा पर लगातार नजर रखना आर्थिक नीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव से आपूर्ति व्यवस्था पर जोखिम
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिश्चितता का प्रमुख कारण बना हुआ है। क्षेत्र में किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर ऊर्जा बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह जोखिम खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा कीमतों और व्यापारिक मार्गों में बदलाव का घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय ने वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव और उनसे पैदा होने वाले बाहरी दबावों पर सतर्क रहने की जरूरत बताई है। हालांकि फिलहाल घरेलू आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार मिल रहा है।

