ब्यूरो सहारनपुर
रिपोर्ट
गांवों में गंदगी का अंबार… नालियां बजबजा रहीं… रास्तों पर कूड़ा… और कागजों में सफाई अभियान जोरों पर! नागल विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था और लार्वा छिड़काव के नाम पर पंचायत निधि से कथित तौर पर लाखों रुपये के भुगतान का मामला अब सवालों के घेरे में है। सूत्रों का दावा है कि कई ग्राम पंचायतों में सफाई, लार्वा छिड़काव और घास पर दवा के नाम पर करीब दो से ढाई लाख रुपये तक की धनराशि खर्च दिखाई गई, लेकिन गांवों में मौके की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल उलट है।
‘दवा’ कागजों में छिड़की या गांव में?
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर पंचायत निधि से दवा छिड़काव हुआ तो गांवों में गंदगी और मच्छरों का राज क्यों है?
सूत्रों के अनुसार कुछ पंचायतों में भुगतान के लिए बिल-वाउचर लगाए गए। आरोप है कि कागजी प्रक्रिया पूरी कर धनराशि निकाल ली गई, जबकि वास्तविक कार्य या तो हुआ ही नहीं अथवा कागजों में दिखाए गए कार्य के मुकाबले बेहद कम हुआ।
मामला सही है तो यह केवल सफाई व्यवस्था की लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
50 से ज्यादा गांवों में सफाई व्यवस्था ध्वस्त!
नागल विकासखंड क्षेत्र के करीब 50 से अधिक गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल होने की बात सामने आ रही है। कई गांवों में नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं। सार्वजनिक रास्तों के आसपास गंदगी पसरी है और जगह-जगह जलभराव की स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्गों और आम नागरिकों तक को गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब सफाई के नाम पर पंचायतों में पैसा लगातार खर्च हो रहा है तो जमीन पर सफाई आखिर कहां है?
बिल निकले, अब मौके की जांच कौन करेगा?
इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण जांच यही होगी कि संबंधित ग्राम पंचायतों में जिन मदों में भुगतान किया गया, वहां वास्तव में कितना काम हुआ।
जांच के दायरे में क्या-क्या होना चाहिए?
– सफाई व्यवस्था के नाम पर हुए भुगतान
– लार्वा छिड़काव की तारीख और स्थान
– खरीदी गई दवा की मात्रा और बिल
– संबंधित फर्म/सप्लायर के बिल-वाउचर
– सफाई कर्मचारियों का मस्टर रोल
– भुगतान की स्वीकृति और अभिलेख
– मौके पर कराए गए कार्य का भौतिक सत्यापन
यदि अभिलेखों और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।
विकास निधि भी सवालों के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों में केवल सफाई ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों के नाम पर खर्च होने वाली धनराशि को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जरूरत है कि संबंधित पंचायतों के पिछले वर्षों के विकास कार्यों और भुगतान की भी ग्रामवार जांच कराई जाए।
सरकारी पैसा है, किसी की जागीर नहीं’
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत निधि जनता के विकास और सुविधाओं के लिए आती है। यदि सफाई और दवा छिड़काव के नाम पर पैसा खर्च दिखाया गया है तो उसका असर गांव की गलियों में भी दिखाई देना चाहिए।
अब निगाहें पंचायत विभाग और विकासखंड स्तर के अधिकारियों पर हैं। सवाल सीधा है
जब गांव में सफाई नहीं हुई तो पैसा किस काम का निकला?और अगर काम हुआ है तो गांव आज भी गंदगी से क्यों जूझ रहे हैं?
मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो पंचायत निधि से सफाई और दवा छिड़काव के नाम पर हुए भुगतान की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।यह संस्करण आरोपों को स्थापित तथ्य मानने के बजाय जांच योग्य सवालों के रूप में रखता है, जिससे खबर की धार भी बनी रहती है और कानूनी जोखिम भी अपेक्षाकृत कम रहता है।

