राम मंदिर ग्राउंड में समझौते की बातचीत के दौरान बिगड़ी बात, बड़े भाई के चेहरे पर नाखून के निशान और उंगली में काटने से चोट; थाने पहुंचा मामला
सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी अंधविश्वास समाज की जड़ों में किस कदर मौजूद है, इसकी बानगी ओबरा नगर में देखने को मिली। ‘भूत-प्रेत’, ‘नजर-टोना’ और तंत्र-मंत्र के संदेह ने एक परिवार में ऐसा विवाद खड़ा कर दिया कि आपसी बातचीत के लिए जुटे दो सगे भाई एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। मंगलवार की रात राम मंदिर ग्राउंड में दोनों के बीच विवाद बढ़ने के बाद मारपीट हो गई। घटना में एक भाई घायल हो गया। पीड़ित ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों के सामने शुरू हुई थी विवाद सुलझाने की कोशिश
बताया जाता है कि ओबरा नगर के सेक्टर-2 निवासी परिवार में पिछले कुछ समय से बीमारी और कथित तंत्र-मंत्र को लेकर आपसी तनाव चल रहा था। परिवार के सदस्यों के बीच एक-दूसरे पर नजर-टोना अथवा तंत्र-मंत्र से नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। इसी को लेकर दोनों भाइयों के बीच पहले भी विवाद हो चुका था।
मंगलवार शाम करीब 8:10 बजे दोनों भाई अपने माता-पिता और अन्य परिजनों के साथ राम मंदिर ग्राउंड पहुंचे। उद्देश्य था कि परिवार के बीच चल रहे विवाद को बातचीत के जरिए समाप्त किया जाए। लेकिन जैसे ही अंधविश्वास से जुड़े आरोपों और पुराने विवादों की चर्चा शुरू हुई, माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कहासुनी के बाद हाथापाई, एक भाई घायल
बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। आरोप-प्रत्यारोप बढ़ते-बढ़ते गाली-गलौज तक पहुंच गए। इसके बाद मामला मारपीट में बदल गया। आरोप है कि छोटे भाई ने बड़े भाई के साथ हिंसक व्यवहार किया।
मारपीट के दौरान पीड़ित के चेहरे पर नाखून लगने से चोट आई, जबकि दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में दांत से काटे जाने के कारण गहरा जख्म हो गया। घटना के बाद परिजनों ने बीच-बचाव कर किसी तरह मामला शांत कराया।
पहले भी थाने पहुंच चुका था विवाद
बताया गया कि भाइयों के बीच विवाद का मामला पहले भी पुलिस तक पहुंचा था। सगे भाइयों के बीच पारिवारिक विवाद होने के कारण उस समय प्रशासनिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था। माना गया था कि आपसी बातचीत से परिवार में विवाद समाप्त हो जाएगा।
हालांकि, मंगलवार को दोबारा हुई मारपीट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि विवाद की मूल वजह अंधविश्वास और आपसी संदेह हो तो केवल समझौता कराने से समस्या का स्थायी समाधान कैसे संभव होगा।
अंधविश्वास के खिलाफ सामाजिक जागरूकता जरूरी
ओबरा की घटना महज दो भाइयों के बीच मारपीट का मामला नहीं, बल्कि अंधविश्वास के सामाजिक प्रभाव की गंभीर तस्वीर भी सामने रखती है। बीमारी या पारिवारिक परेशानियों को तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत अथवा नजर-टोना से जोड़ने की प्रवृत्ति कई बार सामान्य विवाद को भी हिंसक बना देती है।
सोनभद्र के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भी समय-समय पर जादू-टोना, डायन और ओझागिरी के संदेह से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई के साथ समाज में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की आवश्यकता है।
समझौते से आगे बढ़कर काउंसलिंग की जरूरत
परिवार के भीतर इस तरह के विवाद दोबारा न हों, इसके लिए केवल कानूनी कार्रवाई या आपसी समझौता पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जरूरत इस बात की है कि संबंधित परिवारों की काउंसलिंग कराई जाए और लोगों को बीमारी तथा अन्य समस्याओं के वैज्ञानिक कारणों के प्रति जागरूक किया जाए।
अंधविश्वास के नाम पर रिश्तों में पैदा हो रही कड़वाहट को रोकने के लिए प्रशासन, पुलिस, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। ओबरा की यह घटना समाज के सामने एक बार फिर यही सवाल छोड़ती है कि आधुनिकता के दावों के बीच आखिर अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी क्यों हैं?
पुलिस को दी गई शिकायत के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

